याद शायरी – Yaad Shayari

याद शायरी |

माना के तिरा फ़ैज़ अभी, आम नहीं है

क्या “क़ैस” की ख़ातिर भी, कोई जाम नहीं है ? 
(फ़ैज़ = लाभ, उपकार, कृपा)
मेरी ये शिकायत के मुझे, टाल रहे हैं 

उनका ये बहाना के अभी, शाम नहीं है
दिन भर तिरी यादें हैं तो, शब भर तिरे सपने

दीवाने को अब और कोई, काम नहीं है
वो दिल ही नहीं जिस में तिरी, याद नहीं है

वो लब ही नहीं जिस पे तिरा, नाम नहीं है
अपनों से शिकायत है ना, ग़ैरों से गिला है

तक़दीर ही ऐसी है कि, आराम नहीं है
ये “क़ैस”-ए-बला-नोश भी, क्या चीज़ है, यारों 

बद-क़ौल है, बद-फ़ेल है, बद-नाम नहीं है
(“क़ैस”-ए-बला-नोश = शराबी “क़ैस”), (बद-क़ौल = बुरा बोलने वाला), (बद-फ़ेल = बुरे काम करने वाला)
~ राजकुमार “क़ैस”

मज़ा आता अगर गुज़री हुई बातों का अफ़्साना

 कहीं से तुम बयाँ करते कहीं से हम बयाँ करते –

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

दीवार-ए-तकल्लुफ़ है तो, मिस्मार करो ना

दीवार-ए-तकल्लुफ़ है तो,

मिस्मार करो ना गर उस से मोहब्बत है तो,

इज़हार करो ना 
(दीवार-ए-तकल्लुफ़ = औपचारिकता की दीवार), (मिस्मार = तोड़ना)
मुमकिन है तुम्हारे लिए, हो जाऊँ मैं आसाँ 

तुम ख़ुद को मिरे वास्ते, दुश्वार करो ना 
(दुश्वार = मुश्किल)
गर याद करोगे तो,

चला आऊँगा इक दिन 

तुम दिल की गुज़रगाह को,

हमवार करो ना 
(गुज़रगाह = रास्ता, सड़क), (हमवार = समतल)
कहना है अगर कुछ तो,

पस-ओ-पेश करो

मत खुल के कभी जज़्बात का,

इज़हार करो ना 
(पस-ओ-पेश = संकोच, हिचकिचाहट)
हर रिश्ता-ए-जाँ तोड़ के,

आया हूँ यहाँ तक तुम भी मिरी ख़ातिर कोई, ईसार करो ना 
(रिश्ता-ए-जाँ = जीवन का रिश्ता), (ईसार = त्याग करना) 
“एजाज़” तुम्हारे लिए, साहिल पे खड़ा हूँ 

दरिया-ए-वफ़ा मेरे लिए, पार करो ना
(साहिल=किनारा)
-एजाज़ असद

जीवन चक्र

स्नेह मिला जो आपका, हुआ मैं भाव विभोर

,खुशियाँ  कत्थक  नाचतीं  मेरे चारों ओर ।
स्मृतियों में आबद्ध हैं चित्र वो शेष,

विशेष,एक नजर में घूँम लें, ‘पूरन’ भारत देश ।
खेलें, खायें प्रेम से मिलजुल सबके संग,

जीवन का परखा हुआ यही है  सुंदर ढंग ।
वक़्त फिसलता ही रहा ज्यों मुट्ठी में रेत,

समय बिता कर आ गए वापस अपने खेत ।
भवसागर  हम  खे  रहे  अपनी अपनी नाव

,ना जाने किस नाव पर लगे भँवर का दाँव ! 
किसको,कितना खेलना सब कुछ विधि के हाथ,

खेल खतम और चल दिये लेकर स्मृतियाँ साथ !
-पूरन भट्ट 

webstories

Leave a Comment